Monday, July 3, 2017

आधी प्रेमिका- the ghostly tale..

मेरी लिखी हुई एक व्यंग्य कथा...a story without offense... enjoy!!! आज सुबह शनिवार का दिन बड़े मजे से शुरू हुआ....बैंगलोर की गुलाबी ठंढक और शहर से बाहर बनी मेरी सोसाइटी ! इतना आनंद और ऐसी हरियाली कि बस मन का कवि हो या मन की प्रेमिका दोनों ही समस्त कलाओं के साथ बाहर आने को उतावले हो जाते हैं.. ऐसे मानो किसी ने समुद्र को उमड़ने का न्योता दे दिया हो... ऐसे में सुबह छह बजे मैं घूमने के लिए सोसाईटी से बाहर निकली और सामने की सुनसान सड़क पर टहलने लगी। मगर तभी एक सिहरन सी हुई और मेरे कानों में आवाज आई... श श कोई है... मैंने पलट के देखा, पर आस पास कुछ ना मिला फिर थोड़ी देर बाद मैंने वहम समझ के टाल दिया.. लेकिन कुछ और कदम चलने पर फिर आवाज आई... रुक जाओ बहन..! मैं फिर पलटी पर इस बार भी कोई नहीं था... अब तो मैं वाकई डर गयी और हनुमान चालीसा पढना शुरू कर दिया साथ ही हाँफते हांफते अपनी चाल भी तेज कर ली। ऐसा लगा मानो कोई मेरे साथ साथ ही चल रहा हो .. अंत में मैं रुक गयी और कड़कदार आवाज में पूछी "कौन है? सामने आओ" मगर इतनी सी देर में मेरे दिमाग में जी हॉरर शो से ले कर आपबीती तक की कहानियाँ घूमने लगीं और लगा कि बस थोड़ी देर में कोई चुरैल मेरे कंधे पे सवार होकर मेरी गर्दन में ऐसे दाँत चुभोएगी जैसे हम लस्सी के पैक में स्ट्रा डालते हैं! मैं इसी कशमकश में थी और ऊपर से आवाज आई... "ओये ऊपर देख ऊपर। जिन्दा इंसान ! मैं यहाँ हूँ... मैंने देखा एक जीन्स और टीशर्ट पहनी सामान्य सी लड़की ऊपर पेड़ पे बैठी है... मैंने कहा " दिमाग खराब है या बेवकूफ हो? क्यूँ डरा रही मुझे? और हो कौन तुम भाई? वो भूतनियो की तरह पेड़ से हवा में सरकती हुई नीचे आई और बोली "मैं भूतनी हूँ। उसके बाद हमारी बातचीत कुछ ऐसे हुई... मैं: "अरे मजाक बंद करो। पागल हो क्या,किस एंगल से तुम भूतनी लगती हो ?अच्छी खासी सूरत है और खुद को भूतनी बता रही हो? शर्म नहीं आती तुम्हें? और तुम मुझे क्यों परेशान कर रही? भूतनी: अबे हट, तुम साले बिहारी लोग कभी सुधरोगे नहीं। अरे कभी असली का भूत देखा है? और ये जी टीवी, सोनी वाले सब ठगते हैं बहन.. हमारे पास मेकअप नहीं होता और खून कहाँ लगायेंगे? हमारा तो शरीर ही नहीं? मैं: तुम्हें कैसे पता मैं बिहारन हूँ? और तुम्हारे कहने से मैं तुम्हें भूतनी क्यूँ मान लूँ? भूतनी कूद के मेरे कंधे पे बैठ गयी और बोली "अब मानेगी? या और बड़ा डेमो चाहिए? अब तो भाई मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगा । मेरे जिगर, गुर्दे, आँत, सभी शोर मचाने लगे और मैं सूखे पत्ते की तरह डर से थर थर काँपने लगी। मैंने कहा "देखो !मुझे छोड़ दो । मेरे छोटे छोटे बच्चे भी नहीं हैं। मेरा एक ही पति है। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है । मैंने तो अभी दुनियाँ देखी भी नहीं ठीक से । मेरे हाथ पैर सुन्न पड़ने लगे और मैं जोर जोर से पढने लगी "जय हनुमान ज्ञान गुण सागर" इतने में मेरे कंधे से उतर के वो मेरे सामने खड़ी हो गयी। "अरे चुप हो जा मेरी माँ..क्यों सुबह सुबह हनुमान जी को परेशान कर रही है? और ये क्या ?हनुमान चालीसा भी गलत पढ़ रही है। पहले पढना-लिखना सीख। बड़ी आयीं, चालीसा से भूत भगाने वाली। ओ बहन जी। तेरी इन्फो के लिए बता दूँ मरने से पहले मैं भी ब्राम्हण थी वो भी बिहार की शुध्द मैथिल ब्राम्हण "साधवी झा"।और ये मन्त्र ना पढ़ा कर क्योंकि इस सब से मैं तो ना भागने वाली। मैं: "पर आप मेर पीछे क्यों लगी हैं? क्या मुझसे कोई गलती हुई है ? भूतनी: "नहीं गलती तेरी नहीं भाई मेरी ही कुछ जरूरतें हैं जो तुझे पूरी करनी पड़ेंगी। दरअसल, मैंने वो आधी girlfriend की कहानी देखी। पता लगाया कि ये तो गलत है। मैं भी तो माधव झा की बहन हूँ मेरे भाई की अंग्रेजी इतनी भी बुरी ना थी। और पता नहीं दूसरा कोई माधव झा सिमराव में है कि नहीं रे। और कौन सा बिहारी झाजी एक लड़की के पीछे विदेश जाता है भाई? खैर छोड़... सोचा लेखक के घर जा के उसे असली कहानी सुनाऊँ अपनी। और उसे समझाऊं कि असलियत में सारे लड़के-लड़की इतने वेल्ले नहीं बैठे रहते कि यही सब करते रहें... पर उसने न बड़ी बेईज्जती कर दी है बॉय गॉड बिहारियों की सो सोचा तेरे पास आ जाऊँ? तू असली कहानी लिखेगी मेरी। उधर तो मैं बाद में निपट लूँगी। और हाँ ! तू जल्दी से मेरी कहानी लिख वरना तेरा पीछा नहीं छोड़ूँगी। मैं: "अच्छा !तो आप इस माधव झा की बहन हैं?क्या हुआ आपको और आपने शरीर क्यों छोड़ा? विस्तार में बताएँगी तो ज़रा लिखने में सरलता होगी। भूतनी: अरे मैंने पता किया ऐसा कोई कहानी नहीं हुआ था। और इस लेखक की कहानी के चक्कर में जान चली गयी मेरी। मैं: वो कैसे? भगत जी तो बड़े उम्दा लेखक हैं। उनके तो सब फैन हो गए हैं । और उनकी कहानी तो बड़ी प्यारी थी उससे आपका नुकसान कैसे हुआ? भूतनी: "चल हट। एक सूरज बड़जात्या जी ने दोस्ती का कॉन्सेप्ट ला के दिमाग का दही कर ही दिया था और ऊपर से भाईजान ने बोल दिया लड़का-लड़की कभी दोस्त नहीं होते और इस डायलॉग ने कई साल तक गर्लफ्रेंड -बॉयफ्रेंड के नाम का रायता फैला दिया। और अब ये भगत जी ने उसको भी आधा कर दिया! " हॉफ गर्लफ्रेंड।" साला। अब लड़के - लड़की हॉफ गर्लफ्रेंड /बॉयफ्रेंड बोल के रिलेशनशिप इजिली तोड़ देते हैं कि लो भईया हमारा स्टेट्स मैच नहीं करता तो हॉफ बॉयफ्रेंड बनेगें। मैं: ओहो। तो आपके बॉयफ्रेंड ने आपको धोका दे दिया? भूतनी (रोते हुए): आग लगे इस हॉफ-हॉफ को! मेरा बसता घर उजाड़ दिया इस कलमुँही ने। मैंने बड़े प्रेम से ये किताब अपने बॉयफ़्रेन्ड को गिफ्ट की थी।
उसने दो महीने बाद कहा "माधवी झा" हम तुमसे प्रेम नहीं कर सकते हैं।हमारी तुम्हारी जात अलग है और इसलिये हम तुम्हारे पति नहीं बस हॉफ बॉयफ्रेंड बन सकते हैं ।" ऊ कुकुर कहानी में ऐसे खप गया कि हमारा नाम "साधवी" के बदले "माधवी" बोल गया। बस हमारा गुस्सा उबल गया और हमने वही किताब उसके सर पर दे मारी। कहा जाओ भाड़ में तुम बुर्बक। हमको हॉफ नहीं फुल चाहिए। और ज्यादा हॉफ-हॉफ बोलबो ना तो भैया को बोल देंगे ,फिर तुम्हरा सच्चे में दो ठो हॉफ कर देंगे मेरे भैया लोग।
मैं: ये तो बहुत अच्छा किया । पर फिर आप की जान कैसे गई। भूतनी(इस बार विचलित हो कर): भूत। इस रेख्ता कपूर के सीरियल के भूत ने जान ले ली हमारी। इसको भी बहुत दिन से ढूंढ रहे हैं। अकेले मिलेगी की लपक लेंगे। फिर इसके ऊपर कहानी बन जाएगी। ही ही ही ही। ( भूतनी की हंसी बड़ी डरावनी थी और डर के मारे मेरे रोंगटे खड़े हो चुके थे) मैं: कौन है ये रेख्ता? और कौन सा सीरियल ? भूतनी: अरी पगली। तुझे राईटर किसने बना दिया? समझती नहीं क्या ? नाम लेने पर उसके जिन आकर पकड़ लेंगे तुझे। समझ ना जो कहती हूँ। इस रेख्ता के सास-बहु वाले सीरियल का भूत सवार था मेरे सर पर। मैंने समझा हिरोईन जब प्यार में धोका मिलने के बाद जहर खा लेती है तो मर के भी वापस लौट जाती है क्योंकि हीरो सारी जिद छोड़ के उसकी जान बचाता है भगवान से भी लड़ लेता है। यही सोच के मैंने उसे व्हाट्सऐप काल किया और उसके सामाने जहर रख के कहा "मेरे साहिर। तुम्हारी साध्वी अब विदा हुई।" मैं: फिर? फिर क्या हुआ? क्या आपकी जान बची? भूतनी: नहीं ! वो नहीं आया और मैं मर गयी। और तभी से मेरी आत्मा भटक रही है कि काश कोई ऐसा मिले जिससे मैं अपनी प्रेम कहानी लिखवाऊं। और लोगों को समझाऊं कि प्यार मोहब्बत सारे भूत हैं, पैशन गम का बेसिक रूट है। मैं: "आई सी।तो भूतनी जी फिर आपके बॉयफ्रेंड का क्या हुआ? भूतनी: बॉयफ्रेंड नहीं हॉफ बॉयफ्रेंड बोल। मैं : ओह सौरी। आई मीन आपके हॉफ बॉयफ्रेंड। तो क्या आप उनसे मिलीं? क्या आपने उन्हें पनिश किया?और इस कहानी के लिए आप मुझ तक कैसे आयीं? भूतनी(सांस छोड़ते हुए): अरे रुक रुक मैट्रो,रुक जा। एक एक कर पूछ। ऐसे मीडिया वालों और सनसनी , तहलका की तरह सवालों की झड़ी लगा कर डरा मत। मेरा हार्ट फेल हो जाएगा। देख । तुझसे पहले मैं जी टीवी और सोनी के ऑफिस गयी थी ये हॉरर शो के राइटर्स डाइरेक्टर्स का पता लगाने। बड़ी मुश्किल से आफिस के कर्मचारियों को डरा धमका कर पता निकलवाया। मगर ये चैनल वाले बड़े तेज हैं। इन्होंने चुपके से मीडिया को इन्फॉर्म कर दिया। बाहर निकलते ही अलग अलग चैनल वालों ने मुझे घेर लिया और डराने लगे।उनके सवाल एक पर एक गोलियों की तरह पड़ते थे। एक ने पूछा "भूतनी जी,भूतनी जी।आप कैसे मरीं? क्या हुआ था आपको? क्या आप बेरोजगार थीं? क्या आपको मोहब्बत में धोका मिला ?क्या आपने आत्महत्या की थी? मैं जवाब देती उससे पहले दूसरे ने पूछा " क्या आप को दहेज़ के कारण मार दिया गया? या ऑनर किलिंग का मामला था?" तीसरा: " ध्यान से देखिए इस खूबसूरत भूतनी को।जी हाँ ये कोई आम महिला नहीं, भूतनी हैं भूतनी। जो अपने इन्साफ की लड़ाई खुद लड़ रही हैं। किस दिशा में जा रहे हैं हम कि जहाँ मरने के बाद भी इन्हें मुक्ति नहीं मिली। क्या ये नोटबंदी का असर था ? या बढ़ते अपराधों का कहर? क्या मोदी सरकार इस गरीब भूतनी को इन्साफ दे सकेगी? क्या केजरीवाल इनसे भी इनका डेथ सर्टिफिकेट मांगेंगे? आखिर कहाँ गुहार लगाएंगी ये ? यह केस कौन देखेगा? क्या केन्द्र सरकार इनको मुआवजा देगी या नॉवेल के लेखक या बिहार सरकार? अगर आप इनकी लड़ाई में हमारे साथ हैं तो हमें मेल लिखें। बस बहन, मैंने मौक़ा देख के उड़ी मार लिया, वरना तो ये लोग मुझे बहस का मुद्दा बना डालते। बस उसी डर के मारे तेरीे जैसी टुटपूंजी राईटर के पास आई हूँ कि यहाँ मीडिया ना होगी। और रही बात बॉयफ्रेंड से बदला लेने की? तो मैंने उसकी शादी करवा दी है । मैं: " अच्छा। आप वाकई महान हैं। कौन लड़की मर कर भी बेवफा बॉयफ्रेंड का घर बसातीहै?आप एक मिसाल हैं कलयुग में आप जैसे महान लोग कम ही पैदा होते होंगे। भूतनी: " ही ही ही ही।बड़ी भोली है रे राईटरनी! अरे मैंने बदला ही लिया है उससे।चल मैं समझाती हूँ। दरअसल जब पता चलता कि बन्दा लड़की देख़ने जाने वाला है तो मैंने उसको लपक लिया और जानबूझ कर उसकी किसी अच्छी लड़की से शादी होने ही नहीं दी। और अंत में एक सबसे झगड़ालू औरत को देखकर मैंने उसके मुँह से हाँ करवा दिया । अब उसकी ये बीवी भूतनी की भी नानी है। मैं तो एकबार में ही मार देती। उसकी बीवी रोज उसका 100 ml ब्लड चूस जाती है। अब बच्चू को समझ आएगा कि आधा बॉयफ्रेंड बनने की सजा क्या होती है। मैं: "वाह। आपने तो बहुत हिम्मत दिखाई। तो क्या आप अपने बॉयफ्रेंड को उसकी पत्नी के साथ देख पाती हैं? आपको जलन नहीं होती? भूतनी( इस बार दार्शनिक हो कर बोली): बहन! ये सब चोंचले ज़िंदा औरतों के होते हैं। हम ज़िंदा हों तो जलन, कुढ़न, शिकवा, शिकायत ,प्यार- मोहब्बत, दर्द और करार होता है। साला एक बार मर जाओ फिर ना शरीर ना शरीर की जरूरतें और आदतें। मैं तो चाहती हूँ कि घर बसे उसका और बच्चों की लाईन लग जाए। जब आंटे-दाल का भाव मालुम होगा ना फिर अकल ठिकाने आ जाएगी। तब ना आधा बॉयफ्रेंड रह पायेगा ना पूरा पति। अकेले होने में कोई तकलीफ ना होती बहन, जीवन की असली लड़ाई तो गृहस्ती में होती। अब तू घर जा और रोज आकर मुझसे मेरी लव स्टोरी सुनने आ जाना।जिस दिन नहीं आयी उस दिन मैं फिर तुझे लपक लूँगी। बस भइया।मैं तो भाग कर घर आ गयी। अब पाठक लोग ही बताएं क्या मैं ये प्रेमकथा लिखुँ? कॉपीराइट (C) :: Shubhangini Chandrika

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